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8% राहत बॉंड योजना/Relief Bond Scheme

8% राहत बॉंड्स योजना - 2002 D'MAT

(दिनांक 1 मार्च, 2002 से प्रभावी ब्याज दरें संशोधित)

भारत सरकार, वित्त मंत्रालय, ने दिनांक 1 मार्च, 2002 से डी मार्ट योजना के अंतर्गत 8% राहत योजना निर्गम अधिकृत किया है

योजना की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित है:

1. कौन निवेश कर सकता है?:

बॉंड्स निम्न द्वारा धारित किया जा सकता है:

1. एक वैयक्तिक

  1. ए. अपने नाम अथवा एक अवयस्क की ओर से अथवा,
  2. बी. एक के साथ अथवा अधिक व्यक्तियों के साथ संयुक्त रूप से

2. एक हिन्दू अविभक्त परिवार


3. एक अनिवासी भारतीय (मूल धनराशि के प्रत्यावर्तन अधिकार के बिना)

4. जी.पी. नोट किसी पर अथवा उत्तरजीवी आधार पर भी जारी किया जा सकता है.

5. एक अवयस्क एक अथवा अधिक बालिग व्यक्तियों (एक अवयस्क सहित) द्वारा बॉंड्स रखा जा सकता है.

2. एक व्यक्ति कितना निवेश कर सकता है?:

  1. दिनांक 1 मार्च, 2002 से प्रारंभ अवधि में बॉंड्स में निवेश की अधिकतम सीमा रु. 2,00,000/- प्रति निवेशकर्त्ता है.
  2. आवेदन रु.1000/- के गुणांक में होना चाहिए न्यूनतम रु. 1000/- के अधीन.

3. निर्गम प्राइस:

  1. बॉंड्स सममूल्य पर बेचे जायेंगे अर्थात, रु.100% पर.
  2. प्रत्येक रु.1000/-(सांकेतिक) के लिए निर्गम प्राइस रु.1000/- होंगे.

4. एक व्यक्ति कब खरीद सकता है?:

योजना के अंतर्गत बॉंड्स दिनांक 1 मार्च, 2002 से अगले आदेश तक अभिदान हेतु उपलब्ध हैं.

5. निर्गम की तारीख, धारिता की अवधि एवं पुनर्भुगतान :

  1. प्रोनोट/ बॉंड लेजर खाता की प्रकृति में बॉंड्स की निर्गम तारीख नकद में प्राप्त अंशदान की तारीख अथवा ड्राफ्ट जमा की तारीख अथवा चेक संग्रह की तारीख जो भी मामला हो.
  2. बॉंड्स रखने की अवधि निर्गम की तारीख से पांच वर्ष होगी.

    • ए)बॉंड्स के निर्गम की तारीख से 5 पांच वर्ष की समाप्ति पर देय होगा. बॉंड्स का समय पूर्व भुगतान अनुमत नहीं है.
    • बी) यदि बॉंड्स देय तिथि पर मोचन नहीं करता है तो मोचन की तारीख से. ब्याज अर्जित होगा.
  3. प्राप्तिया पुन: निवेश हो सकती हैं. प्रोनोट/विद्यमान स्टॉक प्रमाणपत्र की प्रकृति में परिपक्व बॉंड्स केवल भारतीय रिजर्व बैंक के लोक निर्णय कार्यालय में पुननिवेश हेतु जमा करना होगा.

6. बॉंड्स के प्रकार:

बॉंड्स लेजर खाता अथवा सरकारी प्रोनोट की प्रकृति में जारी होंगे और ये दोनों विकल्प - ए अथवा विकल्प – बी (ए बॉंड्स लेजर खाता) के अंतर्गत रखे जा सकते हैं. बॉंड्स लेजर खाता प्रविष्टि(अर्थात, स्वयं बैंक शाखा) पर बॉंड धारित का अमूर्तीकरण के रूप में हैं. बॉंड लेजर खाता के रूप में बॉंड पावती कार्यालय(रिजर्व बैंक कार्यालय एवं अधिकृत सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शाखाएं) पर जारी किया जायेगा जिसके लिए धारिता का प्रमाणपत्र धारक को जारी किया जायेगा. बॉंड वचनपत्र की प्रकृति में केवल भारतीय रिजर्व बैंक के कार्यालयों में ही जारी होंगे.

7. ब्याज का भुगतान:

विकल्प-ए–अर्द्ध-वार्षिकदेयब्याजवचनपत्र इस विकल्प के अंतर्गत एक निवेशक बॉंड जारी होने की तारीख से अर्द्धवार्षिक अंतराल पर उपर्युक्त पैराग्राफ 5 के उप पैरा के नियम के अनुसार दर 8% प्र.व. ब्याज प्राप्त करेगा. बॉंड निर्गमन की तारीख से 30 जून/31 दिसम्बर तक जो भी मामला हो ब्याज भुगतान किया जाएगा और तत्पश्चात 30 जून एवं 31 दिसंबर पर निवेशकों को अर्द्धवार्षिक उत्तर दिनांकित ब्याज वारंटों के द्वारा वचन पत्र के साथ अग्रिम रूप में किया जायेगा. ब्याज वारंट निर्गम की तारीख से तीन माह के लिए वैध होगा.

बॉंड लेजर खाता बॉंड लेजर खाता के मामले में, खाताधारक के खाते में जमा अथवा ब्याज वारंट अथवा चेक द्वारा जमा.

विकल्प-बी–परिपक्वतापरदेयसंचयीब्याज
इस विकल्प के अंतर्गत 8% प्र.व. ब्याज की दर पर अर्द्धवार्षिक के साथ चक्रवृद्धि रूप में होगा एवं मूलधन के साथ परिपक्वता पर निवेशकों को भुगतान होगा. परिपक्वता के विकल्प के अंतर्गत प्रत्येक 1000/- (नॉमिनल) के लिए बॉंड की कीमत रु.1480.25 (मूल धनराशि एवं संचयी ब्याज) होगी बशर्ते कि ऐसे निवेशकों को 8% प्र.व. की दर से पुन; ब्याज भुगतान होगा जो इसके जारी होने की तारीख से 5 वर्ष की समाप्ति पर अर्द्धवार्षिक अंतराल पर अथवा अर्द्धवार्षिक के अधीन जो भी मामला हो चक्रवृद्धि रूप में अपने बॉंड का नकद भुगतान नहीं लिया है, इस तरह का ब्याज परिपक्वता की तारीख से बॉंड के मोचन तक भुगतान होगा.

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